श्रीकंठ पर भुजंग धर
भस्म सारे अंगों पर मले
जटा से पाविनी गंगा निकले
कैलाश पर ध्यान धरे
निकट नंदी- भृंगी नृत्य करें
मस्तक पर चंद्र हंसें
गौरा की थाली में अक्षत, दीप सजे
सभी देव मिलकर श्रीकंठ का जय-जयकार करें।
© लोकेश कौशिक जी
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