शोभित कंठ नीलमणि
शोभित कंठ नीलमणि धारी,
त्रिपुण्ड लगाते भाल उजारी।
सर्पों की माला, रुद्र विराजे,
भूतों संग, सदा शिव साजे।
श्रीकण्ठ वह, हलाहल पिया,
त्राण हेतु अमृत विष सिया।
नीलकंठ वह करुणा सागर,
सृष्टि करे जो सहज उबारक।
डमरु की धुन, गगन गूंजता,
नटराज रूप, समय को नाचता।
शिव कृपा हो जिस पर भारी,
भवसागर वह पार उतारी।
🌿 हर हर महादेव 🌿
डॉ बीएल सैनी
श्रीमाधोपुर सीकर राजस्थान
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