नीलकंठ कहलाए।
स्वयं शम्भू रहे पीड़ा में,
जग पीड़ा हरने आए।
त्याग समर्पण बलिदान आपका,
महादेव कहलाए।
पार्वती संग ब्याह रचकार।
प्रेम यहां दर्शाए।
गौरा के संग कैलाश पर,
प्रभू धूनी रमाए।
श्री राम का ध्यान लगाकर,
भक्ति भाव जगाए।
भोले बाबा अवघडदानी।
महिमा के गुण गाए।
आदि देव महादेव विभू का,
हम गुणगान सुनाए।
तेरी कृपा से ही भगवन्,
भव सिंधु पार हो जाए।
दया निधि धानेश्वर मेरे,
विपदा सारी मिटाएं।
बेल पत्र और भांग धतूरा,
जो भी उन्हें चढ़ाएं।
बिन मांगे वो सारी दौलत,
उनसे यहां है पाए।
आरती पांडेय
✍️ 🌹 🙏
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