त्रिय ताप हरो, मम् कष्ट हरो,
मेरी बाधाएं दूर करो,हे शंकर!
मेरे जीवन का तुम हो विहान,
तेरी स्तुति करती मैं भगवान
ताप हरो हे शिव शंकर!
दूर करो अब ये अंधियारा,
क्यूं फैला है जीवन में कुहासा?
क्यूं बन गया जीवन ये तमाशा?
एक किरण रोशनी दे दो, मुझे
तम को इस जीवन से हर लो।
करो प्रभु कोई समाधान
ताप हरो हे शिव शंकर!
नाव खड़ी जीवन के तीरे,
बैठ गई मैं, मन में हिलोरें।
लहरें हैं कितनी ऊंची,
डर लागे कि कस्ती डूबी।
बनके खिवैया आओ स्वामी,
पार लगा दो मेरे महादेव।
ताप हरो कष्ट हरो
ताप हरो हे शिव शंकर!
मन नहीं लागे, डर है लागे,
आगे बढूं, फिर मैं हटूं ।
ऐसी दुविधा क्या मैं करूं।
मुझको भरोसा नहीं खुद पर,
टूट चुकी जीवन में अबतक
कदमों में मेरे भर दो उत्साह
यही करूं मैं तुमको आवाहृन
कष्ट हरो ताप हरो!
ताप हरो हे शिव शंकर!
नेहा कुमारी ✍️
No comments:
Post a Comment