हे त्रिलोचन! त्रिताप हरो,
हर संकट दूर करो प्रभु ।
बस तेरा एक सहारा है,
हे श्री कण्ठ महादेव प्रभु।।१।।
हे नीलकंठ !शिव- शंकर- शंभू,
लीला तेरी न्यारी ।
विष- अमृत में भेद नहीं ,
सारी सृष्टि प्यारी।।२।।
जग कहता तुझको महादेव,
तू गंगाधर हो त्रिपुरारी।
कैलाशपति- गिरजापति,
जग लीला तेरी न्यारी।।३।।
बामदेव -कपर्दी- महेश्वरि!
लीला तेरी अपरंपार ।
सुर- नर - मुनि पार न पाते,
महिमा तेरी अपरंपार।।४।।
हंसकर हरते कष्ट भक्त के,
शीघ्र प्रसन्न हो जाते ।
आशुतोष है नाम तुम्हारा,
सब की पीडा़ हरते।।५।।
सुनीता देवी मौर्य,
अंबेडकर नगर ,
उत्तर प्रदेश
No comments:
Post a Comment