भोले शंकर देवादिदेव,नीलकंठ महादेव,
तुम्हारी भक्ति में हर श्वास समर्पित है।
मंथन का विष पीकर भी तुमने,
जगत को जीवन दान दिया।
बेलपत्र, धतूरा, जल के कण—
सब तेरे चरणों में अर्पित हैं।
सावन की बूँदों में घुला आशीष,
तेरी कृपा का मधुर प्रसाद।
पवित्र ॐ नाम का नाद सृष्टि में,
मन का सब अंधकार मिट जाता है।
हे शिव, बस इतना वरदान दो—
नादान के सिर पर हाथ नाथ का हो ।
© मीना जोशी 'मनु'
हल्द्वानी, उत्तराखण्ड
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