देवों के देव हैं महादेव
श्रीकण्ठ महादेव
सुखकर्ता ,दुखहर्ता
जग के पालनकर्ता,
श्रीकण्ठ महादेव।
समुद्र मंथन से निकला
विष और अमृत
अमृत सब ले लिए
हलाहल को क्या करें
समझ न आये,
सारे विष शिव ने पी लिये
और नीलकण्ठ कहलाये।
बिन माँगे जो सब देते हैं
ऐसे हैं हमारे श्रीकण्ठ महादेव,
सावन में कण-कण में विराजे
दूध,दही,घी,शहद,
बेलपत्र,जल अतिप्रिय लागे,
जटा में गंगा धारे,
गले में सर्प की माला
अवघड़दानी ,भभूति रमाये
पार्वती पति हैं जो
जन-जन के प्यारे
घट-घट के वासी
सबके रक्षक हैं
देवाधिदेव महादेव
श्रीकण्ठ महादेव
देवों के देव महादेव।
*हेमलता साहूकार*
*कुरुद (छ ग)*
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