Friday, July 11, 2025

कैलाश के तुम वासी हो : ललित महालकरी जी

श्री कंठ की शोभा न्यारी, 
असुरों के शत्रु त्रिपुरारी" ।

"गरल कंठ में थाम लिया, 
श्री राम को उर में धार लिया" ।

"कैलाश के तुम वासी हो, 
बैरागी और अविनाशी हो" ।

"शिव को जो सावन में ध्याते हैं, 
आशुतोष की पूर्ण कृपा वे पाते हैं" ।

प्रेषक 
© ललित महालकरी 
इंदौर

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