असुरों के शत्रु त्रिपुरारी" ।
"गरल कंठ में थाम लिया,
श्री राम को उर में धार लिया" ।
"कैलाश के तुम वासी हो,
बैरागी और अविनाशी हो" ।
"शिव को जो सावन में ध्याते हैं,
आशुतोष की पूर्ण कृपा वे पाते हैं" ।
प्रेषक
© ललित महालकरी
इंदौर
आशुतोष शंकरा नमामि देव शंकरा शिव समाए सृष्टि में सूक्ष्म रूप कंकरा तुमआकाश , तुम पाताल हो विशाल शंकरा आशुतोष शंकरा नमामि देव शंकरा बारह ज्य...
No comments:
Post a Comment