नीलकंठ धारी।
गले में सर्पों की माला।
बदन श्मशान विभूति वसन।
नीली नीली अंखियों में नीलमणि।
जटाओं में गंगा की बहती धारा।
पहाड़ों में कंदराओं में त्रिशूलधारी की लीला।
नवग्रहों का कहते उसको जन्मदाता।
त्रिगुणात्मक गुणों की रचना करने वाला।
घर घर में पूजे जाने वाले नाथ।
श्री कंठ त्रिपुरारी,नीलकंठ धारी।
जगत के आदि अंत के रचयिता और रखवाले।
ऐसे मेरे शिवा जगत में सबसे निराले।
© डॉ बलवंत सिंह
No comments:
Post a Comment