Friday, July 11, 2025

श्रीकंठ/ नीलकंठ : डॉक्टर लूनेश कुमार वर्मा जी

श्रीकंठ/ नीलकंठ 

देव और दानव मिल किए थे चिंतन। 
रत्नाकर से किया जाए रत्न वरण।

किए समुद्र मंथन मिल योजना बना।
नाग रज्जू मथनी सुमेरू पर्वत बना।

रत्नाशा थी प्रबल उत्साहित थे सब।
लालसा थी करना है पान अमृत रस।

भूल गए अमृत से पहले मिलेगा विष।
उठ खड़ी समस्या विकराल कैसे हित।

न सूझता किसी को कुछ शीघ्र उपाय।
कालों के महाकाल आए बरबस याद।

गए मिल करो कुछ तुम समाधान देव।
भोले तो हैं भोले लाओ वह तुम पेय।

कर लिया ग्रहण हसकर हित कारण।
उदर से पहले श्री कंठ में किया वरण।

हुए प्रसिद्ध जगत में तब से नीलकंठ।
भोले तो भोले हैं जल से ही होते संत।

डॉ. लूनेश कुमार वर्मा 
रायपुर छत्तीसगढ़

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